तृणमूल कांग्रेस (TMC) में भारी कलह चल रही है—लगातार इस्तीफे, निष्कासन और बगावत से ममता बनर्जी की पकड़ कमजोर होती दिख रही है। हाल ही में दो विधायकों को निष्कासित किया गया, 9 पार्षदों के इस्तीफे से डायमंड हार्बर नगर निकाय भंग हो गया, और करीब 100 पार्षदों ने पार्टी छोड़ दी।
🔑 ताज़ा घटनाक्रम
- दो विधायकों का निष्कासन: ममता बनर्जी ने रितब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी से बाहर कर दिया, आरोप है कि उन्होंने विपक्षी नेता चयन प्रक्रिया में दस्तावेज़ों में गड़बड़ी की।
- डायमंड हार्बर में झटका: 9 पार्षदों के इस्तीफे से नगर निकाय भंग हो गया। यह क्षेत्र अभिषेक बनर्जी का गढ़ माना जाता था।
- पार्षदों का सामूहिक पलायन: लगभग 100 पार्षदों ने पार्टी छोड़ी, जिससे जमीनी स्तर पर संगठन कमजोर हुआ।
- ममता बनर्जी का बयान: उन्होंने कहा कि पार्टी “rebels के बिना बेहतर” है और संगठन को नए सिरे से खड़ा किया जाएगा।
📉 संकट के कारण
- 2026 विधानसभा चुनाव में हार: बीजेपी ने 208 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की, जबकि TMC को करारी हार मिली।
- गुटबाज़ी और असंतोष: कई वरिष्ठ नेता ममता बनर्जी की नेतृत्व शैली पर सवाल उठा रहे हैं।
- हिंसा और हमले: अभिषेक बनर्जी पर हाल ही में हमला हुआ, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं में असुरक्षा की भावना बढ़ी।
📊 स्थिति का सारांश
| घटना | प्रभाव | संकेत |
|---|---|---|
| विधायकों का निष्कासन | पार्टी में आंतरिक विवाद उजागर | नेतृत्व पर सवाल |
| पार्षदों का इस्तीफा | नगर निकाय भंग | जमीनी स्तर पर कमजोरी |
| चुनावी हार | संगठन में मनोबल गिरा | गुटबाज़ी तेज |
| ममता का बयान | rebels को गैर-ज़रूरी बताया | पार्टी पुनर्गठन की कोशिश |
⚠️ संभावित परिणाम
- संगठनात्मक टूटन: लगातार इस्तीफे और निष्कासन से पार्टी का ढांचा कमजोर हो रहा है।
- नेतृत्व संकट: ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी पर बढ़ते हमले से नेतृत्व की विश्वसनीयता पर असर।
- बीजेपी को फायदा: TMC की कलह से विपक्ष मजबूत हो रहा है।
👉 कुल मिलाकर, TMC इस समय अपने सबसे बड़े संकट से गुजर रही है। इस्तीफे और निष्कासन से पार्टी का मनोबल गिरा है, और ममता बनर्जी को संगठन को बचाने के लिए कठोर कदम उठाने पड़ रहे हैं।















