नई दिल्ली, 17 नवंबर 2025: भारत में तेजी से बढ़ते घरेलू हवाई यात्रा के किरायों और “अस्पष्ट, शोषणकारी तथा एल्गोरिदम-आधारित” मूल्य निर्धारण प्रथाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए सोमवार को केंद्र सरकार, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और एयरपोर्ट्स इकोनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी (AERA) को नोटिस जारी किया। यह नोटिस सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायणन द्वारा दायर लोकहित याचिका (PIL) पर है, जिसमें निजी एयरलाइंस द्वारा अनियंत्रित किराया वृद्धि और चेक-इन सामान की सीमा घटाने को चुनौती दी गई है। बेंच ने चार हफ्तों के भीतर जवाब मांगा है।मामले का विवरण
- याचिका की मुख्य मांगें: याचिकाकर्ता ने कहा कि एयरलाइंस का “डायनामिक प्राइसिंग” मॉडल यात्रियों के लिए शोषणकारी है, जहां किराए अचानक दोगुने-तिगुने हो जाते हैं। साथ ही, मुफ्त चेक-इन बैगेज की सीमा को 15 किलो से घटाकर 7.5 किलो करने को भी चुनौती दी गई। याचिका में राज्यसभा की स्थायी समिति की मार्च 2025 रिपोर्ट का हवाला देते हुए एक स्वतंत्र एविएशन टैरिफ रेगुलेटर बनाने की मांग की गई, जो किराया संरचना की निगरानी करे, शिकायतों का निपटारा करे और जुर्माना लगाए।
- कोर्ट की बेंच: जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने याचिका को स्वीकार करते हुए केंद्र से विस्तृत जवाब मांगा। कोर्ट ने कहा कि हवाई यात्रा कई क्षेत्रों (जैसे दूरदराज इलाकों) के लिए एकमात्र तेज विकल्प है, इसलिए मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता जरूरी है।
- कानूनी आधार: याचिका में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 और संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) का हवाला दिया गया, जो “सस्ती और सुरक्षित यात्रा” को मौलिक अधिकार मानता है।
बढ़ते किरायों का प्रभावभारत में घरेलू हवाई यात्रा तेजी से बढ़ रही है, लेकिन किराया वृद्धि ने आम आदमी को परेशान कर दिया है। कुछ आंकड़े:
| रूट | औसत किराया (2024) | वर्तमान औसत (2025) | वृद्धि (%) | कारण |
|---|---|---|---|---|
| दिल्ली-मुंबई | ₹4,500 | ₹7,200 | 60% | ईंधन लागत, क्षमता कमी |
| दिल्ली-बेंगलुरु | ₹5,000 | ₹8,500 | 70% | डायनामिक प्राइसिंग |
| मुंबई-चेन्नई | ₹3,800 | ₹6,100 | 61% | एयरलाइंस का एकाधिकार |
- कारण: निजीकरण के बाद एयरलाइंस (इंडिगो, एयर इंडिया आदि) पर नियंत्रण कम हुआ। DGCA के पास किराया कैप करने की शक्ति नहीं, जिससे एल्गोरिदम आधारित मूल्य निर्धारण से किराए अस्थिर हो गए। बैगेज शुल्क भी 20-30% बढ़ा।
- यात्री प्रभाव: विशेष रूप से दूरदराज क्षेत्रों (जैसे पूर्वोत्तर, जम्मू-कश्मीर) के निवासियों और कर्मचारियों के लिए महंगा। 2025 में घरेलू यात्रियों की संख्या 15 करोड़ से अधिक होने का अनुमान, लेकिन किराया वृद्धि से मांग प्रभावित।
सरकार और एयरलाइंस का रुख
- केंद्र: अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं, लेकिन मार्च 2025 की राज्यसभा रिपोर्ट में ही स्वतंत्र रेगुलेटर की सिफारिश की गई थी। नागरिक उड्डयन मंत्रालय पर दबाव बढ़ेगा।
- DGCA/AERA: ये संस्थाएं मौजूदा नियमों (जैसे किराया कैप पर प्रतिबंध हटाना) का बचाव करेंगी, लेकिन कोर्ट के फैसले से नए नियम बन सकते हैं।
- एयरलाइंस: इंडिगो और एयर इंडिया ने कहा कि किराया ईंधन, रखरखाव और क्षमता पर निर्भर करता है। लेकिन याचिका में आरोप है कि एयरलाइंस पूर्ण क्षमता नहीं चला रही।
यह PIL एविएशन क्षेत्र में उपभोक्ता संरक्षण के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है। अगली सुनवाई के बाद स्थिति स्पष्ट होगी। क्या आपको लगता है किराया कैप लगना चाहिए? कमेंट में बताएं। अधिक जानकारी के लिए sci.gov.in चेक करें।















