केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने हाल ही में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि बंगाल में “कानून का राज चलेगा, शरिया नहीं”। यह बयान उन्होंने चुनाव आयोग और राज्य की कानून व्यवस्था को लेकर दिया। सिंह का आरोप है कि ममता बनर्जी चुनाव आयोग को काम नहीं करने दे रही हैं और बंगाल में कानून व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ चुकी है। उन्होंने दावा किया कि अब वहां कानून का राज बहाल होगा, न कि शरिया कानून।
इस बयान से बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इसे विवादास्पद करार दिया, जबकि भाजपा इसे चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है।
विपक्ष और टीएमसी की प्रतिक्रियाएँ
- टीएमसी (तृणमूल कांग्रेस) ने इसे धार्मिक ध्रुवीकरण की राजनीति करार दिया। उनका कहना है कि भाजपा जानबूझकर बंगाल की जनता को बांटने की कोशिश कर रही है और ऐसे बयान चुनावी फायदे के लिए दिए जा रहे हैं।
- विपक्षी दलों ने भी गिरिराज सिंह की टिप्पणी की निंदा की। उनका आरोप है कि इस तरह की भाषा लोकतांत्रिक माहौल को नुकसान पहुँचाती है और समाज में तनाव पैदा करती है।
- गिरिराज सिंह ने ममता बनर्जी पर आरोप लगाया कि वह बांग्लादेशी घुसपैठियों के सहारे सत्ता में बनी रहना चाहती हैं और हिंदुओं का दमन कर रही हैं। उन्होंने ममता को “तुगलक” और “औरंगज़ेब जैसी शासक” तक कहा।
🔍 राजनीतिक असर
- इस बयान से बंगाल की राजनीति और गरमा गई है। भाजपा इसे चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है, जबकि टीएमसी इसे सांप्रदायिक एजेंडा बता रही है।
- राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे बयान चुनावी रणनीति का हिस्सा हैं, जिससे भाजपा अपने समर्थक आधार को मज़बूत करना चाहती है।















