भारत-अमेरिका ट्रेड डील का असर काफी सकारात्मक और बहुआयामी रहा है। यह समझौता 2-3 फरवरी 2026 को पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की फोन बातचीत के बाद घोषित हुआ, जिसमें अमेरिका ने भारतीय सामानों पर लगने वाले टैरिफ को 50% (25% बेस + 25% पेनल्टी, मुख्यतः रूसी तेल खरीद के कारण) से घटाकर 18% कर दिया। यह डील दोनों देशों के बीच महीनों से चले आ रहे व्यापार तनाव को खत्म करने वाली बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक जीत मानी जा रही है।मुख्य बिंदु और असर
- टैरिफ में राहत: अमेरिकी बाजार में भारतीय निर्यात (जैसे टेक्सटाइल, लेदर, जेम्स एंड ज्वेलरी, इंजीनियरिंग गुड्स, समुद्री उत्पाद, झींगा/श्रिम्प आदि) अब सस्ते होंगे। इससे निर्यात बढ़ने की उम्मीद है, खासकर लेबर-इंटेंसिव सेक्टर में रोजगार बढ़ेगा।
- भारत की तरफ से: भारत ने अमेरिकी औद्योगिक सामानों पर टैरिफ को धीरे-धीरे जीरो करने और कुछ कृषि उत्पादों (जैसे ट्री नट्स, फ्रूट्स, वाइन) पर ड्यूटी हटाने पर सहमति जताई। लेकिन कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील सेक्टर को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है (पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया)।
- रूसी तेल और अन्य शर्तें: ट्रंप ने दावा किया कि भारत रूसी तेल खरीद बंद करेगा और अमेरिका से $500 बिलियन तक के सामान (एनर्जी, एयरक्राफ्ट, डिफेंस, टेलीकॉम, फार्मा) खरीदेगा। भारत की ओर से इसे अभी पूरी तरह कन्फर्म नहीं किया गया, लेकिन कुछ रिपोर्ट्स में पेट्रोलियम, डिफेंस और एयरक्राफ्ट खरीद बढ़ाने का जिक्र है। रूसी तेल पर निर्भरता कम करने से भारत को अमेरिकी/वेनेजुएला ऑयल की ओर शिफ्ट करना पड़ सकता है।
- स्टॉक मार्केट पर प्रभाव: डील की घोषणा के बाद 3 फरवरी को Sensex ~2.5% और Nifty ~2.55% चढ़कर क्रमशः 83,739 और 25,727 पर बंद हुआ (9 महीने का सबसे बड़ा दैनिक उछाल)। लेकिन 4 फरवरी को ग्लोबल टेक सेलऑफ (US IT रूट) के कारण बाजार चपेट में आया — Sensex ~500 पॉइंट गिरकर खुला, Nifty 25,650-25,675 के आसपास टिका। IT सेक्टर में 5-6% गिरावट, जबकि टेक्सटाइल, लेदर, एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड स्टॉक्स (जैसे महिंद्रा, टाटा स्टील) में तेजी बनी रही। ब्रोकरेज (Citi, BofA) इसे मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट सेक्टर के लिए ‘गेमचेंजर’ मान रहे हैं।
फायदे किसे?
- एक्सपोर्ट सेक्टर: टेक्सटाइल, लेदर, जेम्स, इंजीनियरिंग, समुद्री उत्पाद — सबसे ज्यादा लाभ।
- मैन्युफैक्चरिंग: चीन+1 रणनीति को बूस्ट, ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की पोजिशन मजबूत।
- कृषि/डेयरी: सुरक्षित रखा गया, किसानों की चिंता कम।
- अमेरिकी पक्ष: भारत में बड़ा बाजार मिलेगा (औद्योगिक सामान, कृषि उत्पाद)।
चुनौतियां/सवाल अभी बाकी
- फाइनल जॉइंट स्टेटमेंट और हस्ताक्षर जल्द होने वाले हैं (7-10 दिनों में)।
- रूसी तेल बंद करने का दावा कितना व्यावहारिक? (भारत ने अभी स्पष्ट नहीं किया)।
- लंबे समय में $500 बिलियन खरीद का कमिटमेंट कितना बाइंडिंग?
कुल मिलाकर, यह डील भारत के लिए एक्सपोर्ट बूस्ट, रोजगार और रणनीतिक पार्टनरशिप की दिशा में बड़ा कदम है, लेकिन डिटेल्स आने के बाद असर और साफ होगा। अगर स्टॉक, सेक्टर या किसी खास पहलू पर ज्यादा डिटेल चाहिए, तो बताएं!















