जहां बीजेपी विधायक दल ने उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को अपना नेता चुना है। यह फैसला 19 नवंबर 2025 को पटना में हुई विधायक दल की बैठक में लिया गया, जो नितीश कुमार के नेतृत्व वाली नई एनडीए सरकार के गठन की प्रक्रिया का हिस्सा है। यह चुनाव बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणामों के बाद आया है, जहां एनडीए ने बहुमत हासिल किया है।पृष्ठभूमि और महत्व
- चुनाव का संदर्भ: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणाम 14 नवंबर 2025 को घोषित हुए, जिसमें एनडीए ने 200 से अधिक सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। नितीश कुमार 20 नवंबर 2025 को पटना के गांधी मैदान में दसवीं बार मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। इसकी तैयारी के तहत, बीजेपी ने अपने विधायकों की बैठक बुलाई, जिसमें सम्राट चौधरी को सर्वसम्मति से नेता चुना गया।
- सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर: सम्राट चौधरी (जन्म: 16 नवंबर 1968) कोएरी/कुशवाहा समुदाय से आते हैं, जो बिहार की ओबीसी राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे मूल रूप से राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) से जुड़े थे, लेकिन 2014 में 13 विधायकों के साथ विद्रोह कर बीजेपी में शामिल हो गए। 2000 और 2010 में वे परबत्ता विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। 2023 में उन्हें बिहार बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया, जो ओबीसी वोट बैंक को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा था। जनवरी 2024 में वे पहले ही बीजेपी विधायक दल के नेता चुने गए और उपमुख्यमंत्री बने। अब 2025 में वे तरापुर (मुंगेर जिला) से विधायक चुने गए हैं, जहां वे आरजेडी के अरुण कुमार साह से 40,000 से अधिक वोटों से आगे चल रहे थे।
- उपमुख्यमंत्री की भूमिका: सम्राट चौधरी पहले से ही बिहार के उपमुख्यमंत्री हैं और पंचायती राज, वित्त, वाणिज्य कर, और आपदा प्रबंधन जैसे विभागों का प्रभार संभालते हैं। यह नया चुनाव उनकी स्थिति को और मजबूत करता है, खासकर नई सरकार में। विजय कुमार सिन्हा को उपनेता चुना गया है।
राजनीतिक प्रभावयह फैसला बीजेपी की बिहार में ओबीसी-केंद्रित रणनीति को दर्शाता है, जो ऊपरी जातियों के पारंपरिक वोट बैंक से आगे बढ़ने का प्रयास है। सम्राट चौधरी की नियुक्ति से कुशवाहा समुदाय (लगभग 8% आबादी) में पार्टी की पकड़ मजबूत होगी। हालांकि, विपक्षी नेता प्रशांत किशोर ने उन पर 1995 के मुंगेर हत्याकांड और उम्र छिपाने के आरोप लगाए, जिन्हें चौधरी ने राजनीतिक साजिश करार दिया।नई सरकार में कैबिनेट विस्तार की उम्मीद है, जिसमें 5-6 नए चेहरे शामिल हो सकते हैं, और सहयोगी दलों (जैसे एलजेएपी, हम, आरएलएम) को प्रतिनिधित्व मिलेगा। नितीश कुमार ने 19 नवंबर को इस्तीफा देकर एनडीए सरकार बनाने का दावा किया है।यह विकास बिहार की राजनीति में स्थिरता लाने की दिशा में एक कदम है, लेकिन जातिगत समीकरणों पर बहस जारी रहेगी। अधिक अपडेट के लिए आधिकारिक स्रोतों पर नजर रखें।















