बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के अंतिम चरण से ठीक पहले, राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता और महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के दावेदार तेजस्वी यादव ने 10 नवंबर 2025 को पटना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जोरदार बयान दिया। उन्होंने दावा किया कि इस बार बिहार की जनता इतिहास रचेगी और “बिहार में नौकरी देने वाली सरकार बनने जा रही है”। यह बयान बेरोजगारी के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए एनडीए सरकार पर सीधा हमला था, जहां उन्होंने कहा कि लोग बदलाव चाहते हैं और महागठबंधन सत्ता में आते ही रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा। primetvindia.com +1बयान का संदर्भ और मुख्य बिंदु
- राजनीतिक पृष्ठभूमि: बिहार चुनाव में रोजगार प्रमुख मुद्दा रहा है। 2020 के चुनाव में भी तेजस्वी ने 10 लाख नौकरियों का वादा किया था, जो अब 2025 में “हर घर नौकरी” के रूप में विकसित हो गया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि उन्होंने अब तक 171 जनसभाएं की हैं और हर जिले में जनता का झुकाव महागठबंधन की ओर दिख रहा है। पहले चरण के मतदान में सभी जातियों और धर्मों के लोगों ने समर्थन दिया है। lalluram.com
- नौकरी का वादा: तेजस्वी ने स्पष्ट किया कि महागठबंधन की सरकार बनने पर राज्य में फूड प्रोसेसिंग यूनिट, आईटी हब और सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल जैसे प्रोजेक्ट्स शुरू किए जाएंगे, जिससे युवाओं को रोजगार मिलेगा। यह दावा उनके पिछले कार्यकाल (2022-2024) के अनुभव पर आधारित है, जब उन्होंने 5 लाख नौकरियां देने का दावा किया था। primetvindia.com +1
- एनडीए पर निशाना: उन्होंने वर्तमान सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी-जद(यू) गठबंधन 20 सालों से नौकरी नहीं दे पाया, बल्कि अब “बेरोजगारी भत्ता” जैसे जुमलों पर उतर आया है। तेजस्वी ने जोर दिया कि उनकी सरकार “ईमानदार और जवाबदेह” होगी। tv9hindi.com +1
इससे पहले के प्रमुख वादे (अक्टूबर 2025)तेजस्वी ने चुनाव प्रचार के दौरान ही नौकरी को केंद्र में रखा था। 9 अक्टूबर 2025 को पटना में एक और प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने “हर बिहारी परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी” देने का ऐलान किया:
- समयसीमा: सरकार बनने के 20 दिनों के अंदर नया अधिनियम (कानून) बनाया जाएगा, और 20 महीनों में सभी योग्य परिवारों को नौकरी सुनिश्चित की जाएगी।
- लक्ष्य: बिहार के लगभग 2.5 करोड़ परिवारों में से जिनके पास कोई सरकारी नौकरी नहीं है, उन्हें प्राथमिकता। यह वादा केवल घोषणा नहीं, बल्कि “प्रण” बताया गया।
- प्रभाव: इस ऐलान ने सियासत में हलचल मचा दी। विश्लेषकों का मानना है कि यह युवा वोटरों को लक्षित है, जहां बिहार की बेरोजगारी दर 15% से ऊपर है। हालांकि, आंकड़ों के अनुसार, इतनी बड़ी संख्या में नौकरियां पैदा करना आर्थिक चुनौतियां पैदा कर सकता है। tv9hindi.com +3
21 अक्टूबर को उन्होंने जीविका दीदियों (महिलाओं के स्वयं सहायता समूह) को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने और 30,000 रुपये मासिक वेतन का वादा किया, जो महिलाओं के वोट बैंक को मजबूत करने की रणनीति है।
republicbharat.comचुनावी संदर्भ (नवंबर 2025 तक)
- चुनाव की स्थिति: बिहार विधानसभा की 243 सीटों पर मतदान चरणबद्ध तरीके से हो चुका है। अंतिम चरण 11-12 नवंबर को है, और नतीजे 14 नवंबर (आज) को आने हैं। महागठबंधन (आरजेडी-कांग्रेस-वामपंथी) बनाम एनडीए (बीजेपी-जद(यू)) की टक्कर है।
- जनता का रुख: तेजस्वी का दावा है कि जनता का “गुप्त समर्थन” उनके साथ है, खासकर युवाओं और महिलाओं में। एनडीए ने भी 10 लाख नौकरियां देने का वादा किया है, लेकिन तेजस्वी इसे “नकल” बता रहे हैं। primetvindia.com +1
- X (पूर्व ट्विटर) पर चर्चा: तेजस्वी के आधिकारिक हैंडल (@yadavtejashwi) पर हाल के पोस्ट्स में यह बयान सीधे नहीं मिला, लेकिन उनके भाई तेज प्रताप यादव (@TejYadav14) के पोस्ट्स चुनावी सभाओं पर केंद्रित हैं, जहां विकास और बदलाव की बातें हैं। सोशल मीडिया पर #NaukriWaliSarkar ट्रेंड कर रहा है।
यह बयान तेजस्वी की रणनीति का हिस्सा लगता है, जो बेरोजगारी को चुनावी हथियार बना रहा है। नतीजों के बाद ही साफ होगा कि जनता ने इसे कितना स्वीकारा। यदि और डिटेल्स चाहिए, तो बताएं!















