हाल ही में हरियाणा विधानसभा चुनावों में वोट चोरी के आरोपों ने सुर्खियां बटोरी हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दावा किया कि हर आठ में से एक वोट फर्जी है, और एक महिला की फोटो दिखाते हुए कहा कि उसने 10 बूथों पर 22 वोट डाले। ऐसे सवालों के बीच आज तक ने राजस्थान और हरियाणा के बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से बात की। BLO ही वोटर लिस्ट को अपडेट और वेरिफाई करने की जिम्मेदारी निभाते हैं। आइए, जानते हैं पूरी प्रक्रिया, BLO की भूमिका, वोट चोरी रोकने के वेरिफिकेशन के तरीके और फोटो जैसी गड़बड़ियों की संभावना।वोटर आईडी कार्ड और वोटर लिस्ट कैसे बनती है?वोटर आईडी और लिस्ट बनाने की प्रक्रिया ऑनलाइन-ऑफलाइन दोनों तरीकों से चलती है, जिसमें BLO की केंद्रीय भूमिका है। मुख्य चरण इस प्रकार हैं:
| चरण | विवरण |
|---|---|
| BLO की नियुक्ति | जिला चुनाव अधिकारी BLO नियुक्त करते हैं (सरकारी कर्मचारी जैसे शिक्षक)। उन्हें एक बूथ क्षेत्र (भाग संख्या) सौंपा जाता है, साथ ही मौजूदा वोटर लिस्ट। |
| अपडेट की जरूरत | BLO नए वोटर (18+), मृत्यु, स्थानांतरण या अपडेट (नाम, पता) के लिए लिस्ट संशोधित करता है। यह घर-घर सर्वे या मतदान केंद्र शिविरों से होता है। |
| ऑनलाइन आवेदन | व्यक्ति NVSP (National Voters’ Service Portal) या BLO ऐप से फॉर्म-6 भरता है। BLO को नोटिफिकेशन मिलता है, जो 3-4 दिनों में वेरिफाई करता है। अप्रूवल पर सेंट्रल सिस्टम से वोटर आईडी जनरेट होती है, जिसे BLO वितरित करता है। |
| ऑफलाइन आवेदन | फॉर्म-6 दस्तावेजों (जन्म प्रमाण पत्र, आधार आदि) के साथ जमा। BLO/निर्वाचन अधिकारी जांचते हैं। |
| SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) | चुनाव आयोग की यह प्रक्रिया: BLO हर घर में यूनिक एन्यूमरेशन फॉर्म बांटता है। 2003 की पुरानी लिस्ट से लिंकिंग होती है। ड्राफ्ट लिस्ट जारी होने पर आपत्तियां दर्ज। |
एक BLO ने बताया, “BLO वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने, अपडेट या हटाने की अनुमति देने वाली कड़ी है।”BLO की भूमिका वोटिंग प्रक्रिया मेंBLO वोटर लिस्ट को सटीक रखने का पुल हैं। वे नए नाम जोड़ते, अपडेट करते, आईडी बांटते और शिविर लगाते हैं। राजनीतिक पार्टियों के BLA (बूथ लेवल एजेंट) उनकी मदद करते हैं, लेकिन वे सरकारी नहीं होते। BLO को सालाना 6,000 रुपये हॉनरैरियम मिलता है (बढ़ाकर 12,000 की चर्चा)। राजस्थान के एक BLO ने कहा, “वोटर आईडी बनाने में वेरिफिकेशन मेरा सबसे बड़ा काम है।”वोट चोरी रोकने के लिए वेरिफिकेशन कैसे होता है?वोट चोरी रोकने के लिए वेरिफिकेशन BLO का कोर जिम्मेदारी है। प्रक्रिया सख्त है:
- व्यक्तिगत जांच: आवेदन पर BLO घर जाकर व्यक्ति, दस्तावेज (आधार, फोटो) और क्षेत्र सत्यापित करता है।
- ऑनलाइन वेरिफिकेशन: BLO ऐप पर नोटिफिकेशन से 3-4 दिनों में अप्रूव/रिजेक्ट। कोई कमेंट न हो तो ऑटो-वेरिफाई, लेकिन BLO ही फोटो/डिटेल्स चेक करता है।
- ऑफलाइन: फॉर्म जमा पर निर्वाचन अधिकारी दस्तावेज जांचते हैं।
- SIR में: पुरानी लिस्ट (2003) से लिंकिंग से फर्जी एंट्री रोकती है।
BLO ने स्पष्ट किया, “ऑनलाइन अप्लाई पर BLO को नोटिफिकेशन मिलता है। हम जांचते हैं कि आवेदन सही है या नहीं। तय समय में रिपोर्ट न दें तो ऑटो हो जाता है, लेकिन जांच हमारी ही होती है।”फोटो में गड़बड़ी की आशंका कहां?राहुल गांधी के उदाहरण जैसे मामलों में फोटो गड़बड़ी के सवाल उठे। BLO ने संभावित कारण बताए:
- टेक्निकल एरर: गलत अपलोड या सिस्टम ग्लिच से फोटो बदल सकती है।
- समय दबाव: वेरिफिकेशन न होने पर ऑटो-मोड में गलत फोटो पास हो सकती है। BLO ने कहा, “फोटो वेरिफाई BLO का काम है, लेकिन अगर कमेंट न करें तो ऑटो हो जाता है। इससे गलती संभव है।”
- अन्य जोखिम: देरी या अपूर्ण जांच से नाम/फोटो मिसमैच। हालांकि BLO जोर देते हैं कि प्रक्रिया पारदर्शी है, लेकिन मानवीय/तकनीकी त्रुटियां हो सकती हैं।
कुल मिलाकर, BLO सिस्टम मजबूत है, लेकिन समयबद्ध वेरिफिकेशन और ट्रेनिंग से धांधली रोकी जा सकती है। चुनाव आयोग SIR जैसी पहलों से पारदर्शिता बढ़ा रहा है। अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक NVSP पोर्टल देखें।















